रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) अपने डाटा लोकलाइजेशन की डेडलाइन को नहीं बढ़ाएगा। यह डेडलाइन 15 अक्टूबर है। जो फर्म अपने डाटा को भारत में स्टोर नहीं करेगी उसके खिलाफ बैंकिंग नियामक दंडात्मक कार्रवाई कर सकता है। आरबीआई डेटा लोकलाइजेशन की शर्तों को उदार नहीं बनाएगा। साथ ही बताया जा रहा है कि अगर कोई फर्म आरबीआई के दिशानिर्देशों को नहीं मानेगी, तो उसके ग्राहकों को इसका नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा।
 
क्या है 
  1. आरबीआई की गाइडलाइन्स के मुताबिक सभी पेमेंट कंपनियों को 15 अक्टूबर तक डाटा लोकलाइजेशन पर कंप्लायंस रिपोर्ट देनी है। इस रिपोर्ट के आधार पर आरबीआई तय करेगा कि किस कंपनी पर क्या कार्रवाई होगी। 15 अक्टूबर से आगे डेडलाइन बढ़ाए जाने की संभावना बहुत कम है।
  2. अगर कोई कंपनी इन नियमों का पालन नहीं करती है तो इसका असर ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा और उनके ट्रांजेक्शंस में रुकावट नहीं आएगी। माना जा रहा है कि मास्टरकार्ड और वीजा जैसे बड़े नेटवर्क अपने डाटा को पूरी तरह भारत में माइग्रेट नहीं कर पाए हैं। हालांकि, वीजा और मास्टरकार्ड ने अपने डाटा को भारत में स्टोर करना शुरू कर दिया है।
  3. कहा जा रहा है कि अधिकतर कंपनियां पहले से ही आरबीआई के इन दिशानिर्देशों का पालन कर रही है और बाकी कंपनियां इस दिशा में लगी हुई है। उम्मीद जताई जा रही है कि डेडलाइन खत्म होने से पहले कंपनियां यह काम कर लेंगी। उद्योग जगत से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि आरबीआई ने तकनीकी चुनौतियों को लेकर दी गई कोई भी दलील नहीं सुनी है।
  4. आरबीआई का कहना है कि कंपनियां देश में डाटा स्टोरेज के लिए क्लाउड बेस्ड सर्विस ला सकती हैं। कहा जा रहा है कि पेटीएम, फोनपे जैसी घरेलू कंपनियों के अलावा व्हाट्सऐप, अमेजन जैसी बड़ी कंपनियां भी आरबीआई के इन दिशानिर्देशों को मान रही हैं।  

 

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