प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय पोषण मिशन की शुरुआत की जिसका लक्ष्य देश में उचित पोषण की कमी से जूझ रहे बच्चों और माताओं की इससे उबरने में मदद करना है।

हैरान करने वाली बात है कि चावल, दूध, गेहूं, सोयाबीन जैसे तमाम पोषक तत्वों के उत्पादन के मामले में दुनिया के अग्रणी देशों में शुमार भारत कुपोषित बच्चों की संख्या के लिहाज से पूरे विश्व में सबसे आगे है। 
 
क्या है 
  1. वर्ष 2017 में आई विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में पांच वर्ष से कम उम्र के करीब 38 फीसद बच्चे कुपोषित हैंजहां 38 फीसद बच्चे छोटे कद की समस्या से पीड़ित हैं तो वहीं पांच वर्ष से कम उम्र के 21 फीसद बच्चे ऐसे हैं जिनका वजन उनके कद के उचित अनुपात में नहीं है। 
  2. बच्चों के कुपोषण का एक प्रमुख कारण गर्भावस्था के दौरान मां की खराब सेहत भी है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में बच्चा पैदा करने की उम्र में 51 फीसद महिलाएं एनीमिया से पीड़ित होती हैं जबकि 22 फीसदी वयस्क महिलाएं अधिक वजन की समस्या से परेशान हैं।
  3. पुरुषों में अधिक वजन की समस्या का अनुपात कम है और 16 फीसदी वयस्क पुरुष इस रोग से पीड़ित हैं। उद्योग संगठन एसोचैम और सलाहकार फर्म अन्स्र्ट एंड यंग यानी ईएंडवाइ की एक साझा रिपोर्ट पिछले एक दशक के दौरान यानी 2005-2015 के बीच शिशु मृत्यु दर में कमी की ओर इशारा करती है, लेकिन इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता है कि दुनिया भर के 50 फीसद कुपोषित बच्चे भारत में ही रहते हैं। 
  4. रिपोर्ट के मुताबिक 2015 के आखिर तक 40 फीसद भारतीय बच्चे कुपोषित थे। दूसरी ओर इस रिपोर्ट से पता चलता है कि देश के शहरी इलाकों में मोटापे की समस्या विकराल रूप धारण करती जा रही है। 
  5. अमेरिका और चीन के बाद मोटापे के मामले में भारत दुनिया में तीसरे पायदान पर है। इसके अलावा भारत दुनिया की डायबिटीज राजधानी के तौर पर भी कुख्यात होता जा रहा है जिसे काफी हद तक जीवनशैली और पोषण संबंधी रुझानों के साथ मिलाकर देखा जा सकता है।

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