फ्रांसिसी राष्ट्रपति इमेनुअल मैक्रों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस साल के अंत तक दुनिया के सबसे बड़े न्यूक्लियर पावर प्लांट का काम आगे बढाएंगे। फ्रांसिसी राष्ट्रपति के भारत दौरे के दौरान दोनों देशों की सरकारों ने एक सांझा बयान जारी कर कहा कि काम पूरा हो जाने के बाद जैतापुर प्रोजेक्ट दुनिया का सबसे बड़ा न्यूक्लियर पावर प्लांट होगा। इसकी कुल क्षमता 9.6 गीगावाट होगी।

अंतराष्ट्रीय उपकरण निर्माता भारत में परमाणु प्रोजेक्ट पर काम करने से बचते रहे हैं। इसका कारण देश का परमाणु दायित्व कानून है, जिसके अनुसार कोई भी दुर्घटना की स्थिति में रिएक्टर सप्लायर को क्षति का भुगतान करना होता है। 
 
क्या है 
  1. यह भारत की परमाणु क्षमता को साल 2032 तक नौ गुना तक बढ़ाने की योजना में बाधा है। एक बयान के जरिए दोनों ही नेताओं ने जैतापुर प्रोजेक्ट पर दोनों पक्षों की सहमति का स्वागत किया है। साथ ही जैतापुर प्रोजेक्ट पर कोई भी दुर्घटना होने पर भारत की परमाणु नीतियों का पालन किया जाएगा।    
  2. फ्रांस के रिएक्टर निर्माता अरेवा एस ए ने पहला समझौता 2009 में साइन किया था। इसके लिए दोनों सरकारों ने सिविल पारमाणु समझौता किया था। 
  3. अरेवा के पुर्नगठन के बाद 2016 में ईडीएफ ने भारतीय परमाणु ऊर्जा निर्माता को 6 रिएक्टर जैतापुर में देने का समझोता किया था। जैतापुर महाराष्ट्र में दक्षिणी तट पर स्थित एक छोटा कस्बा है, जो आम और नारियल के मशहूर है। 
  4. ईडीएफ पहले दो रिएक्टरों के सारे रिकॉर्ड और खरीदें गए उपकरणों का अधिग्रहण करेगा। बाकी बचे चार रिएक्टरों के कुछ कामों के लिए स्थानीय कंपनियों की भी मदद ली जाएगी।   

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