NGO द्वारा पब्लिक मनी का इस्तेमाल करने के बाद उसका ब्यौरा नहीं देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रवैया अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जिन NGO द्वारा हिसाब का ब्यौरा नहीं

दिया गया है उसे ब्लैक लिस्ट किया जाए और उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह 31 मार्च तक हर सूरत में ऐसे NGO का ऑडिट कराएं और अदालत के सामने रिपोर्ट पेश करे।

 
क्या है 
  1. चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि NGO को पब्लिक मनी दी जाती है और ये पैसा जनता का धन है उसका दुरुपयोग नहीं होने दिया जा सकता इसलिए हिसाब-किताब जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से ये भी कहा है कि वह भविष्य में NGO की मान्यता के लिए गाइडलाइंस तय करे और अदालत को इस बारे में अवगत कराए। अदालत ने कहा कि जो भी हलफनामा दिया जाए उसमें जॉइंट सेक्रेटरी रैंक के अधिकारी की मंजूरी होना चाहिए।
  2. सुप्रीम कोर्ट में इससे पहले सीबीआई की ओर से पेश रिपोर्ट का हवाला देकर बताया गया कि दश भर में कुल 32 लाख 9 हजार 44 NGO रजिस्टर्ड हैं, लेकिन इनमें से 3 लाख 7 हजार 72 NGO ही रिटर्न फाइल करते हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने NGO के ऑडिट की निगरानी के लिए कोई मैकेनिज्म नहीं होने पर सरकार की खिंचाई की और तब चीफ जस्टिस ने पूछा कि सरकार पब्लिक मनी का हिसाब क्यों नहीं रखती। कोर्ट को बताया गया जो रिटर्न फाइन नहीं करते उन्हें ब्लैक लिस्ट किया जाता है तब कोर्ट ने कहा कि इतना ही काफी नहीं है।
  3. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस तरह की एक मैकेनिज्म होना चाहिए कि पब्लिक मनी का इस्तेमाल कर रहे NGO की ऑडिट और निगरानी हो। सरकार बड़ी संख्या में NGO को फंड देते हैं और सरकार के पास इसका रेकॉर्ड नहीं है इसकी मंजूरी नहीं दी जा सकती। 
  4. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह 31 मार्च तक तमाम NGO के अकाउंट का ऑडिट करे और हर हाल में ऑडिट रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के सामने सौंपी जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन NGO ने बैलेंसशिट नहीं दी है उन्हें ब्लैक लिस्ट किया जाए और फिर उनके खिलाफ क्रिमिनल केस दर्ज किया जाए।
  5. पांच साल पहले सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट एम. एल. शर्म ने महाराष्ट्र के कई NGO के खिलाफ याचिका दायर की थी और गबन का आरोप लगाया था इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले का दायरा बढ़ाते हुए देश भर के NGO के मामले में सीबीआई से जवाब मांगा था। 
  6. सुप्रीम कोर्ट में दायर CBI के रेकॉर्ड के मुताबिक सोसाइटी रजिस्ट्रेशन ऐक्ट के तहत रजिस्टर्ड किये गये 30 लाख NGO में से सिर्फ 3 लाख NGO ही सालाना फाइनैंशल स्टेटमेंट दाखिल करते हैं। सीबीआई के मुताबिक कुछ राज्यों में पैसों के लेनदेन को पारदर्शी बनाये रखने के लिए कानून तक नही हैं।
  7. सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि था आखिर सरकार अपने ही पैसों का हिसाब क्यों नहीं लेती? क्या असल में सरकार में बैठे लोग ही इन पैसों का इस्तेमाल करते हैं? सीबीआई का कहना था कि यूपी में 5 लाख NGO रजिस्टर्ड है जबकि महाराष्ट्र दूसरे नंबर पर है। इस मामले में 2011 में एडवोकेट एमएल शर्मा ने PIL दाखिल की थी। PIL में आरोप लगाया गया था कि देश भर में कई NGO में फंड का कथित तौर पर गबन हो रहा है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 2 सितंबर, 2013 को सीबीआई से इस बारे में रिपोर्ट पेश करने को कहा गया था।

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Dr Khan

Dr. Khan began his career of teaching in 1988 as lecturer in a college of University of Delhi. He later taught at Delhi School of Economics, University of Delhi. He has several research papers and books to his credit.
Dr. Khan has been teaching General Studies since February 1992 to IAS aspirants and is very proud of the fact that almost every State and Union Territory in India has some civil servants who personally associate with him.

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