छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि सरोगेसी प्रकिया के माध्यम से मां बनने वाली शासकीय महिला कर्मचारी को सरकार के नियमानुसार मातृत्व अवकाश की पात्रता

है।न्यायमूर्ति संजय के अग्रवाल की एकलपीठ ने दुर्ग जिले की एक व्याख्याता साधना अग्रवाल की याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि प्राकृतिक, बायोलॉजिकल तथा सरोगेसी प्रक्रिया के माध्यम से मां बनने पर इनमें भेदभाव नहीं किया जा सकता। 

 
क्या है 
  1. संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मातृत्व तथा बच्चे को बेहतर विकास का अधिकार भी शामिल है।
  2. एकलपीठ ने अपने फैसले में देश की शीर्ष अदालत के कुछ फैसलों का हवाला देते इस मामले में जुड़वां बच्चे की मां बनने वाली याचिकाकतार् के मातृत्व अवकाश के आवेदन को खारिज करने को पूरी तरह अनुचित बताया।
  3. याचिका में कहा गया कि उन्होंने शादी के 26 साल तक नि:संतान रहने के कारण पति के साथ मिलकर सरोगेसी प्रक्रिया के माध्यम से मां बनने का निर्णय लिया। गत 27 मार्च को इंदौर के एक अस्पताल में सेरोगेट मां ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया, जिन्हें याचिकाकतार् को तत्काल सौंप दिया गया। इस पर आठ लाख रुपये खर्च हुए।
  4. याचिकाकर्ता ने घर लौट कर मातृत्व अवकाश के लिए आवेदन दिया, लेकिन चार महीने बाद उनका आवेदन निरस्त करते हुए कहा गया कि सरोगेसी से मां बनने वालों के लिए मातृत्व अवकाश के लिए कोई नियम नहीं है।

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