अभी तक अल नीनो को मानसून में कमी और मौसम चक्र में गड़बड़ी के लिए ही जिम्मेदार माना जाता था। लेकिन, हांग कांग की बैप्टिस्ट यूनिवर्सिटी, चीन की सबसे पुरानी नानजिंग यूनिवर्सिटी, चीन की ही फूडान यनिवर्सिटी और अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने अब इसके एक और घातक प्रभाव के बारे में खुलासा किया है। वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में पाया कि अल नीनो केवल मानसून को ही नहीं प्रभावित करता है, यह वायु प्रदूषण भी बढ़ाता है। इस बार सर्दियों में यह उत्तर भारत में वायु प्रदूषण की समस्या को और गंभीर बना सकता है।
 
 
क्या है 
  1. रिसर्च जर्नल साइंस एडवांसेज में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, अल नीनो और प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान में भारी बदलाव उत्तर भारत में वायु प्रदूषण के स्तर को प्रभावित कर सकता है। 
  2. अल नीनो की वजह से जंगलों की कार्बन डाई ऑक्साइड को सोखने की क्षमता प्रभावित हुई है। यही नहीं इससे पूरी दुनिया में आग लगने की घटनाओं में इजाफा हुआ है, जिससे कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्र बढ़ती है। बता दें कि नासा ने अपने एक अध्ययन में दावा किया था कि अल नीनो अंटार्कटिका में सालाना दस इंच बर्फ को पिघला रहा है।
  3. अपने अध्ययन में वैज्ञानिक मेंग गाओ और उनके साथियों ने पाया कि अल नीनो की परिस्थितियां वायु प्रदूषण के स्तर को बेहद खराब कर सकते हैं। वैज्ञानिकों की मानें तो सर्दियों के दौरान मजबूत अल नीनो उत्तर भारत में हवा की गति को कमजोर करेगा। 
  4. वायुमंडल में आया यह ठहराव सर्दियों के दौरान प्रदूषण की स्थितियों को और गंभीर बना सकता है। बता दें कि सर्दियों के दौरान उत्तर भारत में धूल कणों, पराली जलाने और औद्योगिक उत्सजर्न से वातावरण में स्मॉग की परिस्थितियों का निर्माण होता है। 
  5. इससे दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के कई हिस्सों में लोगों का जीना मुहाल हो जाता है। ऐसे में सर्दियों के दौरान अल नीनो की परिस्थितियां उत्तर भारत में स्मॉग की समस्या को और गंभीर बना सकती हैं।
क्‍या है अल नीनो 
  1. समुद्र के तापमान और वायुमंडलीय परिस्थितियों में आए बदलाव के लिए उत्तरदायी समुद्री घटना को अल-नीनो कहा जाता है। 
  2. मौसम विशेषज्ञों की मानें तो अल नीनो के प्रभाव से प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह गर्म हो जाती है। इससे हवाओं का रास्ते और रफ्तार में परिवर्तन आ जाता है। इसके चलते मौसम चक्र प्रभावित होता है। इसके कारण कई स्थानों पर सूखा पड़ता है। 
  3. हालांकि, अमेरिकी मौसम एजेंसियों की मानें तो आने वाले एक या दो महीनों में अल नीनो खत्म हो सकता है क्योंकि यह धीरे धीरे कमजोर पड़ रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग में मानसून पूर्वानुमान के प्रमुख डी. शिवानंद पई के मुताबिक, यह एक अच्छी खबर है। 
  4. लेकिन वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि अल नीनो बाढ़ के लिए भी जिम्मेदार होता है। देश में बाढ़ के हालातों को देखते हुए यह बात सटीक भी बैठती है।